शनिवार, 2 मई 2015

तेरे बिना उदास है दुनिया मेरी .....

 तेरे बिना उदास है दुनिया मेरी .....
बस अब तो हर पल यही लगता है की तेरे बिना रह नहीं पाउँगा, ये वक्त का बुरा दौर चल रहा है न इसमें सिर्फ तू भगवान् ही सहारा लगते हो मेरे तू चाहे तो तो भी ये तूफ़ान रुक सकता है और भगवान् चाहे तो फिर तो बात ही कुछ और है ..



                                                         संजय      

बिन तेरे कैसे है जीना

फेस बुक और व्हाट्स अप की दुनिया भी फीकी लगने लगी है , अब उस पर भी ना जाने क्यूँ दिल ही नहीं लगता , या बस कुछ दिनों से ये परेहानी बढ़ गई है दिलो दिमाग में एक अजीब सा खुमार है समझ नहीं आता दिल का दर्द किससे , कैसे और कहाँ बयाँ करूँ , तो याद आया की डेड दो वर्ष पहले जब में ठीक इसी तरह बुरे मानसिक खवाब से गुजर रहा था तो मुझे ये ब्लॉग ही अपना साथी लगता था यहीं अपने मन की बात लिखा करता था , तो आज भी जब चारों और कोई भी ऐसा दोस्त नहीं दिख रहा जिससे में अपने मन का दर्द सांझा कर सकूँ तो एक बार फिर अपने ब्लॉग अपनी डायरी की और लौटना पडा , आज तक जो बीता और जो जारी है बुरा दौर सब यही छपता जाएगा ...हो सकता है कभी मेरा समय आये और में काफी अच्छा हो जाऊं मेरी वीरान जिन्दगी गुलजार बन जाए तो उन बेदर्द लम्हों को इस खूबसूरत डायरी के माध्यम से निहारते हुए इस गली से निकलूंगा .................!!



संजय    

सोमवार, 9 सितंबर 2013

कुछ लम्हे जो रुक गए मेरे साथ साथ ...

आज फिर कुछ है ख़ास
09.09.2013
ये आभास हमेशा रहेगा की कुछ लम्हे मेरे हो गए और मेरे ही रह गए ...........संजू

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

आज तूफ़ान उठा है....................................संजय

आज तूफ़ान उठा है कुछ ऐसा इस दिल में के वो बरस के चले गए, छाता लेकर निकले थे घर से हम पर वो भिगो कर ही चले गए !!
अपनों ने बहुत कहा और हमने भी बहुत सहा , मानी ना कभी उनकी और जोर अपना भी ना चला,
समंदर के उस पार वो थे, और साहिल भी हमारा ना बना !!
 
सुना है आत्मा अमर है और शरीर नश्वर, पर अब तक के जीवन में ऐसा लगा है की आत्मा कई बार मर चुकी है और शरीर चल रहा है..ऐसा क्यूँ होता है और ऐसा क्यूँ लगता है?
की किसी के प्यार में हमने गुजार दी हसींन जिंदगी समंदर के साहिल पर ही !!
 

शनिवार, 23 जुलाई 2011

पापा कुछ पल के लिए ही सही .....

पापा कुछ पल के लिए ही सही पर आप जरुर आना,.....
पापा आपको आज  हमसे बिछुडे हुए पूरे दो साल होने जा रहे हैं मुझे याद है, आज ही के दिन ठीक मेरे लिखने के समय यानि 5:15 सायं आप हमें दुनिया की भीड़ में छोड़ कर सदा के लिए हमसे दूर जाने की तैयारी कर चुके थे, इस वक्त और उस वक्त में फर्क सिर्फ इतना सा है वो दिन मंगल वार था और आज दिन बीरवार  है, और उस दिन आपके लिए मेरे दिल में पीड़ा और  दर्द था आज सिर्फ एहसास  है !  
पापा वैसे तो जाने अनजाने में शायद मैंने आपको बहुत दुःख भी दी होंगे, पर आपके प्रेम व करुना के आगे में नतमस्तक था और हमेशा अपनी अंतिम सांस तक रहूंगा,
पापा मैं आज एक नजर आपके व्यक्तित्व पर पुन: डालना चाहता हूँ  और एक एक पल को दोबारा जीना चाहता हूँ वो भी आपके साए में आपके साथ आपकी गोद में आपके कंधे पर सर रखकर!

क्रमश: